केदारनाथ ट्रेक पर भूस्खलन के बाद 1,500 श्रद्धालुओं का रेस्क्यू, SDRF-NDRF की टीमों ने सुरक्षित पहुंचाया

केदारनाथ भूस्खलन के बाद 1500 श्रद्धालुओं का रेस्क्यू

रुद्रप्रयाग/उत्तराखंड: उत्तराखंड में लगातार बारिश के बीच केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन की घटना सामने आई। चिरबासा क्षेत्र में मार्ग बाधित होने के कारण करीब 1,500 श्रद्धालु प्रभावित क्षेत्र में फंस गए थे। सूचना मिलने के बाद SDRF, NDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने अभियान चलाकर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें गौरीकुंड की ओर पहुंचाया।

चिरबासा में भूस्खलन से बाधित हुआ रास्ता

अधिकारियों के अनुसार, चिरबासा क्षेत्र गौरीकुंड से करीब तीन किलोमीटर आगे स्थित है। भूस्खलन के कारण रास्ते पर मलबा जमा हो गया था। इसके अलावा पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण पैदल आवाजाही भी जोखिमपूर्ण हो गई थी।

स्थिति की जानकारी मिलने के बाद सोनप्रयाग से SDRF की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद SDRF, NDRF और DDRF की टीमों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टीमों ने श्रद्धालुओं को भूस्खलन प्रभावित हिस्से से सावधानीपूर्वक निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

करीब 1,500 श्रद्धालुओं को गौरीकुंड पहुंचाया गया

रेस्क्यू अभियान के दौरान करीब 1,500 श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड की ओर भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक अभियान के दौरान लगातार हो रहे पत्थर गिरने को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।

भारी बारिश के कारण उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। विभिन्न स्थानों पर 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को सुरक्षा कारणों से रोका गया था, हालांकि यह संख्या चिरबासा में फंसे 1,500 श्रद्धालुओं से अलग है।

चारधाम यात्रा को लेकर नया अपडेट

मौसम में सुधार के बाद 28 सितंबर को उत्तराखंड में चारधाम यात्रा दोबारा शुरू होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि चिरबासा के पास केदारनाथ पैदल मार्ग पर मलबा और पत्थरों से क्षतिग्रस्त हिस्से में मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम जारी है। इस मार्ग पर पैदल आवाजाही फिलहाल प्रभावित है, जबकि हेलीकॉप्टर सेवा के माध्यम से केदारनाथ धाम की यात्रा जारी है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सलाह को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने की अपील की है।

नोट: यात्रा मार्ग की स्थिति मौसम और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के अनुसार बदल सकती है।

The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

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