दिल्ली में चुनाव आयुक्त के खिलाफ आंदोलन जारी, SIR पर रोक और इस्तीफे की मांग को लेकर बढ़ा विवाद

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दिल्ली में विरोध प्रदर्शन का मुद्दा लगातार चर्चा में है। इस आंदोलन में शामिल संगठनों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए SIR को समाप्त करने और मतदाता सूची में बदलावों की समीक्षा कराने की मांग की है।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर क्यों हो रहा विरोध?

विरोध का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची में किए जा रहे बदलाव और पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा है। विपक्षी दलों और आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों की उचित जांच होनी चाहिए।

वहीं, निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हट गया है, तो उसके दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया उपलब्ध है। इस तरह विवाद का केंद्र मतदाता सूची की शुद्धता, नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता बना हुआ है।

प्रदर्शनकारियों ने उठाई इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग

अक्टूबर में दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक समूहों और नागरिक संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने मतदाता सूची में बदलावों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया और पुनरीक्षण प्रक्रिया की समीक्षा से जुड़ी मांगें उठाईं।

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR विवाद को लेकर विरोध प्रदर्शन
दिल्ली में SIR विरोध प्रदर्शन

इसके बाद भी विरोध से जुड़ी गतिविधियां जारी रहीं। 16 अक्टूबर को प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। 18 अक्टूबर को उन्हें शांति बनाए रखने से संबंधित बंधपत्र पर हस्ताक्षर करने की शर्त के साथ रिहा किया गया। इसी घटनाक्रम के दौरान छात्र संगठन AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की रिहाई की जानकारी भी सामने आई।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का मुद्दा भी चर्चा में

आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकार का सवाल भी उठाया। कुछ संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग की।

इस बीच, दिल्ली में प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों को लेकर भी चर्चा हुई। पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित सूची से हटाने और अन्य स्थान उपलब्ध कराने की जानकारी दी थी। इस फैसले को लेकर प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का मुद्दा सामने आया।

आगे क्या होगा?

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर रोक और मतदाता सूची में बदलावों की समीक्षा की मांग को लेकर आंदोलनकारी संगठन अपना विरोध जारी रखने की बात कह रहे हैं। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने अपने ऊपर लगाए गए पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

 

The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

द राष्ट्र दर्पण

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