रायपुर,छत्तीसगढ़। सरकारी जांच एजेंसी का नाम इस्तेमाल करके लोगों को डराने वाले साइबर अपराधियों का एक मामला रायपुर में सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 62 वर्षीय महिला को कथित वित्तीय अपराध में फंसाने की धमकी दी गई। कई दिनों तक चले इस घटनाक्रम के बाद महिला से 7 लाख रुपये दूसरे बैंक खाते में जमा करा लिए गए।
फोन कॉल से शुरू हुई धोखाधड़ी
रिपोर्टों के मुताबिक, महिला से संपर्क करने वाले व्यक्ति ने खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि महिला की पहचान का इस्तेमाल एक संदिग्ध बैंक खाते के लिए किया गया है। इसके बाद कथित जांच और गिरफ्तारी का भय दिखाकर महिला पर दबाव बनाया गया।
ऐसे मामलों में अपराधी अक्सर सरकारी विभागों के नाम, फर्जी दस्तावेजों और वीडियो कॉल का सहारा लेते हैं। उनका मकसद पीड़ित को इतना परेशान करना होता है कि वह बिना जांच किए उनकी बात मान ले।
पांच दिनों तक बनाए रखा संपर्क
बताया गया है कि आरोपियों ने लगातार संपर्क में रहकर महिला से निजी और वित्तीय जानकारी हासिल की। उन्होंने कथित कानूनी कार्रवाई से बचने के नाम पर महिला को निर्देश दिए। डर और भ्रम के माहौल में महिला अपनी जमा पूंजी निकालने की प्रक्रिया में जुट गईं।
बैंक ट्रांसफर के जरिए गई रकम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को महिला ने RTGS के माध्यम से 7 लाख रुपये एक बैंक खाते में भेजे। आरोपियों ने जांच पूरी होने और आवश्यक प्रमाणपत्र मिलने का भरोसा दिलाया था। बाद में वादा पूरा नहीं होने पर महिला को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।
इस मामले में रायपुर के गंज थाना क्षेत्र में शिकायत और पुलिस जांच की जानकारी रिपोर्टों में दी गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी अथवा जांच के अंतिम नतीजे की पुष्टि के बिना इस संबंध में कोई दावा नहीं किया जाना चाहिए।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से कैसे बचें?
याद रखें कि कोई व्यक्ति केवल फोन या वीडियो कॉल पर खुद को अधिकारी बताकर आपको कानूनी रूप से गिरफ्तार नहीं कर सकता। अगर कोई गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे मांगता है, तो सावधान हो जाएं।









