सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में प्रसव के दौरान सामने आई गंभीर लापरवाही के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। अस्पताल का गेट समय पर नहीं खुलने के कारण एक गर्भवती महिला को स्वास्थ्य केंद्र के बाहर खुले स्थान पर बच्चे को जन्म देना पड़ा। घटना के बाद नवजात की मौत हो गई, जबकि महिला की हालत गंभीर बताई गई है।

अस्पताल का गेट नहीं खुलने से बिगड़े हालात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए पहुंची गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल में चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। स्वास्थ्य केंद्र का गेट नहीं खुलने के कारण महिला को परिसर में ही खुले स्थान पर प्रसव करना पड़ा। इस घटना में नवजात की जान चली गई और प्रसूता की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव जैसी आपात स्थिति के दौरान समय पर सहायता उपलब्ध नहीं होने का यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, घटना के पूरे घटनाक्रम, जिम्मेदारी और लापरवाही के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
CMHO ने की कार्रवाई,प्रभारी डॉक्टर और नर्स निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरजपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) प्रशांत सिंह ने तत्काल कार्रवाई की है। गणेशपुर स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. राजेश पटेल और ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स प्रमिला गिरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य घटना के दौरान सामने आई कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करना है। मामले में संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और ड्यूटी के दौरान बरती गई प्रक्रियाओं की जांच की जाएगी।

जांच समिति करेगी घटना के कारणों की पड़ताल
स्वास्थ्य विभाग ने घटना की परिस्थितियों और समयक्रम का पता लगाने के लिए जांच समिति गठित की है। समिति यह पता लगाएगी कि गर्भवती महिला को समय पर चिकित्सा सहायता क्यों नहीं मिल पाई और स्वास्थ्य केंद्र का गेट समय पर नहीं खुलने के पीछे क्या कारण थे।
जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
गणेशपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की इस घटना ने प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
अब जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार था और भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।









