कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में दिखा शांति का संदेश, ‘बियोंड साउंड’ थीम ने खींचा ध्यान

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा अपनी भव्य सजावट, कलात्मक प्रस्तुतियों और सामाजिक संदेशों के लिए जानी जाती है। इसी परंपरा के बीच उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल ने इस वर्ष अपनी अलग अवधारणा के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यहां स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा और पंडाल की सजावट में युद्ध और शक्ति प्रदर्शन के बजाय ध्यान, शांति तथा सद्भाव को प्रमुखता दी गई।

‘बियोंड साउंड’ थीम में दिखाई गई नई अवधारणा

चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा आयोजन की इस वर्ष की थीम ‘बियोंड साउंड’ (Beyond Sound) रखी गई थी। इस अवधारणा के माध्यम से एक ऐसे वातावरण की कल्पना प्रस्तुत की गई, जहां शोर, संघर्ष और टकराव से परे जाकर शांति तथा आत्मचिंतन के महत्व को समझा जा सके।

पंडाल की कलात्मक प्रस्तुति ने दुर्गा पूजा के पारंपरिक दृश्य से अलग दृष्टिकोण सामने रखा। यहां धार्मिक आस्था को एक ऐसे संदेश के साथ जोड़ा गया, जो लोगों को शांति और आपसी समझ की ओर प्रेरित करता है।

युद्धरत नहीं, ध्यानमग्न मुद्रा में मां दुर्गा

दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा को प्रायः महिषासुर का वध करते हुए दर्शाया जाता है। यह स्वरूप बुराई पर अच्छाई की विजय और अन्याय के विरुद्ध शक्ति का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, चोरबागान के इस पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा को शांत और ध्यानमग्न मुद्रा में प्रस्तुत किया गया।

इस अलग रूपांकन ने श्रद्धालुओं के सामने देवी के स्वरूप को देखने का एक नया नजरिया रखा। यहां केंद्र में युद्ध का दृश्य नहीं, बल्कि ध्यान, शांति और आंतरिक स्थिरता का भाव दिखाई दिया।

महिषासुर के सामने भी हथियारों की जगह समर्पण

पंडाल की एक अन्य विशेषता इसकी दृश्य संरचना रही। मां दुर्गा के आसपास भक्तों को ध्यान की मुद्रा में दिखाया गया, जबकि महिषासुर को युद्ध करते हुए दिखाने के बजाय उनके सामने हथियार डालते हुए प्रस्तुत किया गया।

इस प्रतीकात्मक दृश्य के जरिए हिंसा और संघर्ष से दूर रहने तथा शांति और सद्भाव को महत्व देने का संदेश सामने आया। पूरी अवधारणा ने यह विचार प्रस्तुत किया कि टकराव के स्थान पर संयम, आत्मचिंतन और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

91 वर्षों की परंपरा के साथ नई कलात्मक सोच

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा आयोजन ने 91 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इतने लंबे इतिहास के साथ यह आयोजन उत्तर कोलकाता की पुरानी और चर्चित दुर्गा पूजा परंपराओं में शामिल है।

इस वर्ष की थीम ने परंपरा और आधुनिक कलात्मक अभिव्यक्ति के बीच एक अलग मेल प्रस्तुत किया। मां दुर्गा की ध्यानमग्न प्रतिमा, भक्तों की साधना मुद्रा और महिषासुर का समर्पण—इन सभी दृश्यों को मिलाकर शांति तथा सद्भाव का संदेश देने का प्रयास किया गया।

चोरबागान का यह पंडाल इस बात को रेखांकित करता है कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान और आकर्षक सजावट तक सीमित नहीं है। पंडालों के माध्यम से सामाजिक विचारों और मानवीय मूल्यों को भी कलात्मक रूप में लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

द राष्ट्र दर्पण

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