कैंसर के इलाज पर खर्च घटाने की पहल, 137 दवाओं के लिए सरकार ने तय की नई सीमा

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं

केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं की कीमतों को अधिक किफायती बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने इन दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन की अधिकतम सीमा 30 प्रतिशत निर्धारित की है। सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से संबंधित दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के औषध विभाग की ओर से 17 अक्टूबर 2026 को जारी जानकारी के अनुसार, नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। यह निर्णय कैंसर की दवाओं की वितरण व्यवस्था में अत्यधिक व्यापारिक मार्जिन को नियंत्रित करने और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

137 कैंसर दवाओं पर क्या बदलेगा?

सरकार की नई व्यवस्था के तहत चिन्हित 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। इसका उद्देश्य दवा की आपूर्ति और बिक्री के दौरान जुड़ने वाले अतिरिक्त मार्जिन पर नियंत्रण रखना है।

यहां ध्यान देना जरूरी है कि 70 प्रतिशत तक कीमत घटने का अनुमान सभी दवाओं पर समान रूप से लागू नहीं होगा। प्रत्येक दवा की मौजूदा कीमत और उसकी मूल्य संरचना के आधार पर वास्तविक कमी अलग-अलग हो सकती है।

किन मरीजों को मिल सकता है फायदा?

इस फैसले में कैंसर के विभिन्न प्रकारों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें कुछ इम्यूनोथेरेपी दवाएं भी हैं, जिनका उपयोग 20 से अधिक प्रकार के कैंसर के उपचार में किया जाता है।

इस सूची में डेनोसुमैब, पेगफिलग्रास्टिम और बेवेसिजुमैब जैसी दवाओं के साथ पेम्ब्रोलिजुमैब, डुरवालुमैब तथा ओसिमर्टिनिब जैसी दवाएं भी शामिल बताई गई हैं। इनका इस्तेमाल अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों में होता है। हालांकि, किसी मरीज को कौन-सी दवा दी जाएगी, यह उसकी बीमारी और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

दवाओं की कीमतों में कमी से उन मरीजों और परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है, जिनके उपचार में इन चिन्हित दवाओं का इस्तेमाल होता है। वास्तविक बचत संबंधित दवा की संशोधित कीमत और मरीज की उपचार संबंधी जरूरतों पर निर्भर करेगी।

9 नवंबर से लागू होंगी संशोधित कीमतें

NPPA की अधिसूचना के मुताबिक, दवा कंपनियों को अधिसूचना प्रकाशित होने के सात दिनों के भीतर संशोधित कीमतों की जानकारी प्राधिकरण को देनी होगी। कंपनियों को नई मूल्य सूची अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करने के साथ खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों तक भी पहुंचानी होगी।

9 नवंबर 2026 से संबंधित दवाओं की संशोधित कीमतें लागू होंगी। खुदरा दुकानों और अस्पतालों को नई कीमतों के अनुसार बिक्री करनी होगी तथा मूल्य सूची प्रदर्शित करनी होगी। नियमों के पालन की निगरानी के लिए राज्य औषधि नियंत्रकों को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

दवाओं की नई कीमत कैसे पता करें?

मरीज और उनके परिजन संबंधित दवाओं की संशोधित कीमतों की जानकारी राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ (Pharma Sahi Daam) ऐप के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार ने दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया है। संबंधित कंपनियों को अधिसूचित दवाओं का मौजूदा उत्पादन और आपूर्ति स्तर बनाए रखना होगा, ताकि कीमतों पर नियंत्रण के साथ मरीजों को दवाएं मिलने में बाधा न आए।

पहले भी उठाया गया था ऐसा कदम

कैंसर की दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने वर्ष 2019 में भी व्यापारिक मार्जिन को सीमित करने की पहल की थी। उस समय 42 कैंसर दवाओं पर मार्जिन की सीमा तय की गई थी। सरकारी जानकारी के अनुसार, उस पहल के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के 526 ब्रांडों के अधिकतम खुदरा मूल्य में 90 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई थी।

अब 137 अन्य चिन्हित दवाओं को लेकर की गई नई पहल का उद्देश्य इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाना और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं को मरीजों के लिए अधिक सुलभ बनाना है।

महत्वपूर्ण बात: नई व्यवस्था से सभी कैंसर दवाओं की कीमतों में एक समान कटौती नहीं होगी। मरीजों को अपनी निर्धारित दवा की संशोधित कीमत की पुष्टि आधिकारिक स्रोत से करनी चाहिए और उपचार में किसी भी तरह का बदलाव डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

 

The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

द राष्ट्र दर्पण

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