कोरिया की संतोषी सोनवानी ने बदली जिंदगी की तस्वीर, बकरीपालन को बनाया सफल व्यवसाय

कोरिया की लखपति दीदी संतोषी सोनवानी बकरीपालन के साथ

कोरिया, 28 सितंबर 2026। आत्मविश्वास, मेहनत और सही आर्थिक सहयोग मिले तो पारंपरिक आजीविका भी एक मजबूत व्यवसाय का रूप ले सकती है। कोरिया जिले के ग्राम पंचायत भैंसवार के जामटिकरा की रहने वाली संतोषी सोनवानी ने अपने बकरीपालन के पारंपरिक काम को व्यवस्थित व्यवसाय में बदलकर ग्रामीण महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

कभी सामान्य घरेलू जीवन और सीमित आय के बीच परिवार की जिम्मेदारियां संभालने वाली संतोषी आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें अपने पारंपरिक काम को विस्तार देने का अवसर मिला और आर्थिक सहयोग ने उनके प्रयासों को नई दिशा दी।

साधारण पारिवारिक जीवन से शुरू हुआ सफर

संतोषी का परिवार खेती और पशुपालन से जुड़ा रहा है। परिवार के पास कृषि भूमि थी, जहां सामान्य खेती की जाती थी। इसके साथ ही बकरी तथा गाय-बैल पालन भी पारंपरिक रूप से परिवार की आजीविका का हिस्सा रहा।

आर्थिक जरूरतों के समय संतोषी खेतिहर मजदूरी जैसे कार्य भी करती थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनके मन में अपनी आय बढ़ाने और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की इच्छा बनी रही।

बिहान से जुड़ने के बाद मिला नया अवसर

गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद संतोषी को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर स्व-सहायता समूह की गतिविधियों में भागीदारी शुरू की।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास मिला। इसी क्रम में समूह की महिलाओं के साथ मिलकर करीब 6 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया गया। इस आर्थिक सहयोग का उपयोग संतोषी ने अपने पारंपरिक बकरीपालन को बड़े और व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने में किया।

शेड बनाकर शुरू किया व्यवस्थित बकरीपालन

संतोषी ने बकरीपालन के लिए व्यवस्थित शेड तैयार किया और पारंपरिक तरीके से किए जा रहे कार्य को व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाया। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए अपने काम का विस्तार किया।

शुरुआत में परिवार की ओर से बड़े स्तर पर काम शुरू करने को लेकर कुछ संकोच रहा, लेकिन संतोषी ने अपने निर्णय और मेहनत से परिवार को भी भरोसा दिलाया। धीरे-धीरे उनकी मेहनत का असर परिवार की आर्थिक स्थिति और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका पर दिखाई देने लगा।

आर्थिक आत्मनिर्भरता से बढ़ा आत्मविश्वास

बकरीपालन को व्यवसाय के रूप में विकसित करने के बाद संतोषी की आय में बढ़ोतरी हुई। आज वह अपनी आर्थिक गतिविधि के जरिए परिवार की जरूरतों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं और स्वयं भी आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर हुई हैं।

संतोषी के लिए ‘लखपति दीदी’ बनना केवल आय बढ़ने की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और परिवार में बढ़ी भागीदारी का भी प्रतीक है।

उनकी कहानी यह बताती है कि ग्रामीण महिलाओं को यदि संगठित समूह, आर्थिक संसाधन और आगे बढ़ने का अवसर मिले तो पारंपरिक काम को भी टिकाऊ आजीविका और व्यवसाय में बदला जा सकता है।

अन्य महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

संतोषी सोनवानी की सफलता ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपना काम शुरू करने या मौजूदा आजीविका को विस्तार देने की इच्छा रखती हैं।

बिहान जैसे स्वयं सहायता समूह आधारित प्रयास महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग कर रहे हैं। कोरिया की संतोषी की कहानी इसी बदलाव की एक तस्वीर पेश करती है। जिला कोरिया की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जिले में बिहान से संबंधित गतिविधियों और सूचनाओं का उल्लेख मिलता है।

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The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

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