कोरिया, छत्तीसगढ़। जिले के सोनहत विकासखंड में जर्जर सड़कों और आदिवासी समुदाय की जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इंजीनियर संजय सिंह कमरो की ओर से कोरिया कलेक्टर को भेजे गए पत्र के अनुसार, संगठन 27 अक्टूबर 2026 से पदयात्रा शुरू करेगा। इसके बाद 28 अक्टूबर को बैकुंठपुर स्थित जिला कलेक्ट्रेट का घेराव और आमसभा आयोजित करने की योजना है।
पार्टी ने अपने प्रस्तावित कार्यक्रम में ग्रामीण सड़कों की स्थिति, आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जमीन के इस्तेमाल से जुड़े सवालों को प्रमुखता दी है। संगठन का कहना है कि इन विषयों पर संबंधित प्रशासन और शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए आंदोलन किया जा रहा है।
वर्षों से सड़क सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों का मुद्दा
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने सोनहत विकासखंड के रामगढ़ से आनंदपुर-गोयनी मार्ग और रामगढ़ से सेमरिया मार्ग की स्थिति पर चिंता जताई है। पार्टी के अनुसार, इन मार्गों पर आवागमन में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से मध्यप्रदेश की सीमा के नजदीक बसे गांवों के लोगों के लिए जिला मुख्यालय तक पहुंचना कठिन होने का मुद्दा उठाया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि सड़क संपर्क की समस्या का असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही पर पड़ता है। स्थानीय लोगों को जरूरी कामों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। पार्टी ने इन मार्गों के निर्माण और सुधार की मांग करते हुए कहा है कि दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

इन गांवों की सड़कों का मामला उठाया
पार्टी ने अपने पत्र में कई ग्राम पंचायतों और आश्रित गांवों का उल्लेख किया है। इनमें दसेर, कछुआखोह, आनंदपुर, धनपुर, नटवाही, चुलादर, सलगवांखुर्द और कुर्थी शामिल हैं। इसके अलावा सिंवोर, उधेनी, बघवार, अमृतपुर, सेमरिया और सुकतरा जैसे गांवों की सड़क समस्याओं को भी उठाया गया है।
संगठन ने संबंधित मार्गों के निर्माण और आवश्यक सुधार की मांग की है। अब इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
क्षतिपूरक वनीकरण के लिए जमीन आवंटन पर आपत्ति
सड़क निर्माण के मुद्दे के साथ पार्टी ने वनभूमि और आदिवासी समुदाय के पारंपरिक उपयोग वाली जमीन से संबंधित विषय भी उठाया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि परसा ओपन कास्ट कोयला खदान के एवज में कोरिया वनमंडल के पोड़ी-बचरा परिक्षेत्र में क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आदिवासियों की जमीन को स्वीकृति दी गई है।
पार्टी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जमीन के इस्तेमाल से जुड़े निर्णयों की समीक्षा करने और कथित आवंटन को निरस्त करने की मांग की है। ये आरोप पार्टी की ओर से प्रस्तुत ज्ञापन पर आधारित हैं। जमीन के स्वामित्व, संबंधित स्वीकृति, ग्रामसभा की सहमति और प्रशासनिक प्रक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती।
ग्रामसभा की सहमति और पारंपरिक अधिकारों का सवाल
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का कहना है कि संबंधित जमीन के संबंध में आदिवासी समुदाय की सहमति और ग्रामसभा की भूमिका को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। संगठन ने इसे समुदाय के पारंपरिक उपयोग और अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
ज्ञापन में वन विभाग और संबंधित कॉर्पोरेट हितों के बीच मिलीभगत का आरोप भी लगाया गया है। पार्टी का दावा है कि आदिवासियों के पारंपरिक निस्तार वाली जमीन को अडानी समूह से जुड़े हितों के लिए इस्तेमाल किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। संगठन ने इस मामले की समीक्षा और कथित निर्णय को रद्द करने की मांग की है।
इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित विभागों का पक्ष, भूमि अभिलेख, स्वीकृति संबंधी दस्तावेज और ग्रामसभा के अभिलेख महत्वपूर्ण होंगे। उपलब्ध सामग्री में इन सभी पक्षों की स्वतंत्र प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

27 अक्टूबर को त्रिवटी गऊघाट से शुरू होगी पदयात्रा
पार्टी की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को सोनहत विकासखंड के त्रिवटी गऊघाट से 100 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू की जाएगी। संगठन ने इसके साथ वन मंत्री केदार कश्यप की सांकेतिक शवयात्रा निकालने की भी घोषणा की है।
पार्टी का प्रस्तावित कार्यक्रम देर रात सोनहत पहुंचने के साथ आगे बढ़ेगा। इस पदयात्रा के माध्यम से संगठन सड़क निर्माण, ग्रामीण संपर्क व्यवस्था और आदिवासी जमीन से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है।
28 अक्टूबर को बैकुंठपुर कलेक्ट्रेट घेराव की योजना
आंदोलन के दूसरे दिन, 28 अक्टूबर 2026 को कार्यकर्ताओं के सोनहत से बैकुंठपुर पहुंचने का कार्यक्रम बताया गया है। यहां जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करने और आमसभा आयोजित करने की योजना है। पार्टी ने इन गतिविधियों के माध्यम से अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखने की बात कही है।
कार्यक्रम के दौरान संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की भी घोषणा की गई है। हालांकि, आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों की संख्या, प्रशासन की ओर से जारी व्यवस्था और कार्यक्रम में किसी बदलाव की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
पुलिस प्रशासन को भी भेजी गई सूचना
प्रस्तावित पदयात्रा और कलेक्ट्रेट घेराव को देखते हुए पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, कोरिया को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों के लिए पुलिस प्रशासन को सूचित करना बताया गया है।
अब इस पूरे मामले में सड़क निर्माण की मांगों, वनभूमि से जुड़े आरोपों और ग्रामसभा की सहमति के प्रश्न पर संबंधित विभागों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। 27 और 28 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के दौरान पार्टी किन मांगों को औपचारिक रूप से प्रशासन के सामने रखती है और उन पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर आगे नजर रहेगी।
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