विजयादशमी पर मां दुर्गा की विदाई, आरती और पूजा के बाद विसर्जन की परंपरा निभा रहे श्रद्धालु

शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना करने वाले श्रद्धालु इस अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमाओं और स्थापित कलश के विसर्जन की परंपरा निभा रहे हैं। यह अवसर भक्तों के लिए आस्था, श्रद्धा और भावुक विदाई का प्रतीक है।

अंतिम आरती के साथ मां दुर्गा को विदाई

विसर्जन से पहले श्रद्धालु मां दुर्गा की आरती करते हैं और नवरात्रि के दौरान पूजा में अनजाने में हुई किसी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करते हैं। इसके बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कलश और प्रतिमा को विदाई दी जाती है। कई स्थानों पर भक्त ढोल-नगाड़ों, शंख की ध्वनि और ‘जय माता दी’ के जयकारों के साथ विसर्जन यात्रा में शामिल होते हैं।

कलश, ज्वारे और प्रसाद से जुड़ी परंपराएं

नवरात्रि में स्थापित कलश पर रखे नारियल तथा पूजा के प्रसाद को श्रद्धालुओं के बीच बांटने की परंपरा है। इसी तरह जौ से तैयार ज्वारों को भी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाता है। इन परंपराओं के माध्यम से भक्त नवरात्रि की पूजा का समापन करते हैं और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

विसर्जन के दौरान सुरक्षा और स्वच्छता जरूरी

दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों और कृत्रिम कुंडों का उपयोग करना उचित है। श्रद्धालुओं को नदी या तालाब में उतरने से बचना चाहिए और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए। पूजा सामग्री और प्रतिमा के अवशेषों का निपटान भी स्थानीय नियमों तथा पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप किया जाना चाहिए।

विजयादशमी का यह पर्व मां दुर्गा की आराधना के साथ धर्म और सदाचार के प्रति आस्था को मजबूत करने का संदेश देता है। नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा के बाद श्रद्धालु मां से सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हुए अगले वर्ष फिर से उनके आगमन की कामना करते हैं।

75 दिवसीय महापर्व: मां दंतेश्वरी की पूजा से जुड़ी अनोखी रस्में, CM साय को आमंत्रण

The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

द राष्ट्र दर्पण

Leave a Comment