रायपुर। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक एवं स्थानीय स्वास्थ्य उपचार पद्धतियों को व्यवस्थित रूप से प्रमाणित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा 25 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रदेश के छह जिलों में 312 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया।
इस अभियान के तहत कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जिलों के पारंपरिक उपचार पद्धतियों से जुड़े वैद्यों का परीक्षण किया गया। यह प्रक्रिया वन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत संचालित बोर्ड की पहल पर आयोजित की गई।
वैद्यों के प्रमाणीकरण के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) से अधिकृत संस्था सेंटर फॉर ट्रेड टेस्टिंग एंड सर्टिफिकेशन ऑफ स्किल्ड वर्कर्स (CTTC) द्वारा परीक्षण प्रक्रिया पूरी की गई। प्रमाणीकरण में पांच प्रमुख उपचार विधियों को शामिल किया गया। इनमें सामान्य बीमारियों का उपचार, पीलिया, आर्थराइटिस, बोन सेटिंग और जहरीले बाइट के उपचार से संबंधित पारंपरिक ज्ञान एवं कौशल का परीक्षण किया गया।

दो चरणों में हुआ वैद्यों का परीक्षण
वैद्यों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की गई। पहले चरण में आवेदन पत्रों की जांच के साथ वैद्यों के उपचार संबंधी ज्ञान का मौखिक परीक्षण लिया गया। इसके अलावा ताजा औषधीय पौधों और कच्चे औषधीय पादप उत्पादों की पहचान, औषधि तैयार करने की प्रक्रिया तथा मरीजों को दी जाने वाली औषधि की मात्रा से संबंधित जानकारी का भी परीक्षण किया गया।
प्रमाणीकरण के दूसरे चरण में वैद्यों के घरों पर जाकर उनके उपचार की सजीव प्रक्रिया का परीक्षण किया गया। इस दौरान उपचार पद्धति का व्यावहारिक आकलन करने के साथ मरीजों से उपचार को लेकर फीडबैक भी लिया गया।

छह जिलों में 312 वैद्य प्रमाणित
25 से 30 सितंबर के बीच आयोजित प्रमाणीकरण प्रक्रिया में कुल 312 वैद्यों को प्रमाणीकृत किया गया। इनमें कोंडागांव के 60, नारायणपुर के 23, कांकेर के 60 और धमतरी के 135 वैद्य शामिल हैं। वहीं गरियाबंद एवं महासमुंद से कुल 34 वैद्यों का प्रमाणीकरण किया गया।
छत्तीसगढ़ शासन और बोर्ड द्वारा पारंपरिक एवं स्थानीय स्वास्थ्य परंपराओं से जुड़े वैद्यों के प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को आगे भी जारी रखने की योजना है। मार्च 2027 तक प्रदेश में 1 हजार वैद्यों के प्रमाणीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए संबंधित स्तर पर प्रक्रिया को गति देने का काम किया जा रहा है।
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