मनेंद्रगढ़, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम घुटरा में ‘राष्ट्रपति’ नाम के एक व्यक्ति से जुड़ा मामला अब केंद्र सरकार के संबंधित विभागों तक पहुंच गया है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मनेंद्रगढ़ शहर के अध्यक्ष सौरव मिश्रा ने संवैधानिक पदों और राष्ट्रीय महत्व से जुड़े शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग उठाई है। इस संबंध में उनके द्वारा भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने 17 सितंबर 2026 को संबंधित केंद्रीय विभागों को पत्र भेजा।
राष्ट्रपति सचिवालय ने गृह मंत्रालय और विधि विभाग को भेजा पत्र
सौरव मिश्रा के मुताबिक, उन्होंने इस विषय पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को अलग-अलग पत्र भेजकर केंद्र सरकार से नीतिगत पहल करने का आग्रह किया था। राष्ट्रपति सचिवालय से प्राप्त पत्र के अनुसार, याचिका को भारत सरकार के गृह मंत्रालय में गृह सचिव तथा विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के ध्यानार्थ भेजा गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण से संबंधित याचिका का क्रमांक P1/B/202609162221 है। पत्र में 8 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति को संबोधित याचिका का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों को उस पर उचित ध्यान देने के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। साथ ही, की गई कार्रवाई की जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को देने का भी उल्लेख है।
हालांकि, संबंधित विभागों को याचिका भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि प्रस्तावित कानून को मंजूरी मिल गई है। अब इस विषय पर संबंधित विभागों की आगे की कार्रवाई और निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।
नाम के कारण सरकारी और बैंकिंग कार्यों में परेशानी का दावा
इस पूरे मामले की शुरुआत ग्राम घुटरा के एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी बताई गई है, जिसका नाम ‘राष्ट्रपति’ है। सौरव मिश्रा की याचिका में दावा किया गया है कि इस नाम के कारण संबंधित व्यक्ति को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान भ्रम तथा अन्य व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
इसी उदाहरण को आधार बनाकर उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष व्यापक नीति तैयार करने का विषय रखा है। उनका तर्क है कि संवैधानिक पदों से जुड़े कुछ शब्दों के व्यक्तिगत नाम के रूप में इस्तेमाल की स्थिति में स्पष्ट नियम नहीं होने से प्रशासनिक स्तर पर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
संवैधानिक पदों से जुड़े शब्दों पर स्पष्ट नियम बनाने की मांग
सौरव मिश्रा ने अपनी याचिका में ‘राष्ट्रपति’, ‘प्रधानमंत्री’, ‘मुख्यमंत्री’, ‘राज्यपाल’ और ‘भारत’ जैसे शब्दों का उल्लेख किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों की समीक्षा कर इस विषय पर आवश्यक नियम बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
उनकी मांग है कि जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श लेकर विधायी या प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था तैयार की जाए। इससे एक ओर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़े प्रश्नों पर स्पष्टता आ सकती है, वहीं दूसरी ओर नाम के कारण किसी नागरिक को होने वाली संभावित परेशानियों के समाधान पर भी विचार किया जा सकेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय में भी आवेदन देने की जानकारी
सौरव मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इस विषय को प्रधानमंत्री कार्यालय के समक्ष भी रखा है। उनके अनुसार, वहां भी मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हुई कार्रवाई के संबंध में विस्तृत आधिकारिक विवरण प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य ग्राम घुटरा के किसी व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है। उनके अनुसार, इस प्रकरण के जरिए वह ऐसी प्रशासनिक परिस्थितियों को सामने लाना चाहते हैं, जिनमें किसी नागरिक को अपने नाम के कारण सरकारी या वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है।
नागरिकों के अधिकार और संवैधानिक गरिमा के बीच संतुलन पर जोर
सौरव मिश्रा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस विषय पर विचार करते समय नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों, नाम रखने की स्वतंत्रता और संवैधानिक पदों की गरिमा को ध्यान में रखा जाए। उनका कहना है कि किसी भी प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि व्यावहारिक समस्याओं का समाधान करना और नियमों को स्पष्ट बनाना होना चाहिए।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, याचिका राष्ट्रपति सचिवालय से गृह मंत्रालय और विधि एवं न्याय विभाग के संबंधित अधिकारियों तक भेजी गई है। इस विषय पर किसी नए कानून की घोषणा या मंजूरी की पुष्टि नहीं हुई है। अब आगे की प्रक्रिया संबंधित विभागों के विचार और निर्णय पर निर्भर करेगी।









