छत्तीसगढ़ में 42 साल पुराने भूमि विकास नियम बदले, अब जमीन के इस्तेमाल पर नई व्यवस्था; जानिए किस जमीन पर क्या नहीं बना सकेंगे

छत्तीसगढ़ में बदले भूमि उपयोग नियम 2026

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन के इस्तेमाल से जुड़े चार दशक से ज्यादा पुराने नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन किया है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संशोधित प्रावधानों को 7 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है।

नए नियमों में भूमि उपयोग को लेकर पुरानी व्यवस्था की जगह प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची यानी Negative List को आधार बनाया गया है। इसका मतलब यह है कि संबंधित भूमि उपयोग श्रेणी में जो गतिविधि प्रतिबंधित सूची में शामिल नहीं है, उसे सामान्य तौर पर अनुमति योग्य माना जाएगा। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी भी जमीन पर बिना दूसरी वैधानिक अनुमति के कोई भी निर्माण या गतिविधि शुरू की जा सकती है। भवन निर्माण, पर्यावरण, सुरक्षा, स्थानीय निकाय और अन्य लागू नियमों का पालन जरूरी रहेगा।

सात श्रेणियों में बांटा गया भूमि उपयोग

संशोधित व्यवस्था में भूमि उपयोग की सात प्रमुख श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक, परिवहन, आमोद-प्रमोद और कृषि भूमि उपयोग शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग प्रतिबंधित गतिविधियों का प्रावधान किया गया है।

आवासीय जमीन पर किन गतिविधियों पर रोक?

आवासीय भूमि उपयोग वाले क्षेत्रों में प्रदूषणकारी उद्योगों के साथ कई ऐसी गतिविधियों को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है, जो सामान्य रिहायशी वातावरण के अनुकूल नहीं मानी जातीं।

इनमें विभिन्न श्रेणी के उद्योग, बड़े गोदाम, कबाड़खाने, बूचड़खाने, संक्रामक रोगों से जुड़े अस्पताल, कारागार और बड़े परिवहन टर्मिनल जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

इसके अलावा थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, कुक्कुट पालन और खनन जैसी गतिविधियों पर भी प्रतिबंध निर्धारित किया गया है। दाह संस्कार और कब्रिस्तान से जुड़े उपयोग भी आवासीय श्रेणी की प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल हैं।

वाणिज्यिक जमीन पर भी तय हुई प्रतिबंधित गतिविधियां

वाणिज्यिक भूमि उपयोग क्षेत्र में भी कुछ गतिविधियों को प्रतिबंधित रखा गया है। इनमें कुछ प्रदूषणकारी उद्योग, खतरनाक या विषाक्त रसायनों का भंडारण, विस्फोटक सामग्री का भंडारण, पशुपालन, मछली पालन, डेयरी, कुक्कुट पालन और खनन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

दाह संस्कार और कब्रिस्तान से संबंधित उपयोग भी इस श्रेणी की प्रतिबंधित गतिविधियों में रखे गए हैं।

औद्योगिक जमीन पर क्या नहीं किया जा सकेगा?

औद्योगिक भूमि का उपयोग मुख्य रूप से औद्योगिक गतिविधियों के लिए होता है। इसलिए संशोधित नियमों में ऐसी कई गतिविधियों को प्रतिबंधित किया गया है जो औद्योगिक उपयोग के अनुरूप नहीं हैं।

औद्योगिक क्षेत्र में पूर्ण आवासीय टाउनशिप, कुछ अपवादों को छोड़कर, स्कूल, संक्रामक रोग अस्पताल, कारागार और बड़े परिवहन टर्मिनल जैसी गतिविधियों पर रोक है। थोक व्यापार, तेल डिपो, पेट्रोलियम एवं ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम तथा कुछ पशुपालन और डेयरी संबंधी उपयोग भी प्रतिबंधित सूची में रखे गए हैं।

कृषि जमीन के इस्तेमाल पर भी स्पष्टता

कृषि भूमि को लेकर भी नए भूमि उपयोग नियमों में अलग प्रावधान किए गए हैं। कृषि उपयोग वाली जमीन पर बड़े वाणिज्यिक परिसर, बड़े मॉल, कुछ औद्योगिक गतिविधियां और उच्च घनत्व वाली आवासीय योजनाएं प्रतिबंधित सूची में रखी गई हैं।

इस व्यवस्था का उद्देश्य कृषि उपयोग वाली भूमि को ऐसे बड़े व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग में बदलने से नियंत्रित करना है, जो निर्धारित भूमि उपयोग से मेल नहीं खाते।

सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक क्षेत्र में भी प्रतिबंध

सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक भूमि उपयोग के लिए भी अलग प्रतिबंधित गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। इसमें पूर्ण आवासीय टाउनशिप, भारी वाणिज्यिक गतिविधियां, कुछ प्रदूषणकारी उद्योग, खतरनाक पदार्थों का भंडारण, बूचड़खाने, कबाड़खाने, खनन और गैस गोदाम जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

परिवहन और आमोद-प्रमोद क्षेत्र के लिए अलग नियम

परिवहन तथा आमोद-प्रमोद भूमि उपयोग क्षेत्रों में भी ऐसे उपयोगों को प्रतिबंधित किया गया है जो संबंधित क्षेत्र की प्रकृति के विपरीत हैं। इनमें आवासीय बस्तियां, उद्योग, प्रदूषणकारी व्यावसायिक गतिविधियां, खनन, खतरनाक पदार्थों का भंडारण, गैस गोदाम, तेल डिपो और कुछ पशुपालन संबंधी गतिविधियां शामिल हैं।

आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?

नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भूमि उपयोग व्यवस्था को Negative List आधारित बनाया गया है। यानी किसी श्रेणी में हर गतिविधि को अलग-अलग अनुमति वाली सूची में तलाशने के बजाय यह देखा जाएगा कि वह गतिविधि संबंधित भूमि उपयोग की प्रतिबंधित सूची में शामिल है या नहीं।

इससे जमीन के उपयोग से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट और बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है। हालांकि किसी गतिविधि का प्रतिबंधित सूची में नहीं होना अपने आप में सभी तरह की सरकारी मंजूरियों से छूट नहीं देता।

जमीन खरीदने या निर्माण से पहले यह जरूर जांचें

नए नियम लागू होने के बाद भी जमीन खरीदने, भवन बनाने, व्यावसायिक गतिविधि शुरू करने या भूमि उपयोग बदलने से पहले संबंधित भूमि की निर्धारित श्रेणी और स्थानीय नियमों की जांच करना जरूरी होगा।

इसके साथ ही भवन अनुज्ञा, पर्यावरण संबंधी प्रावधान, सुरक्षा मानक, स्थानीय निकाय की अनुमति और जहां आवश्यक हो वहां भूमि उपयोग परिवर्तन या अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में 1984 से चले आ रहे भूमि विकास नियमों में यह बदलाव भूमि उपयोग व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अब अलग-अलग भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए प्रतिबंधित गतिविधियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। इससे जमीन के उपयोग को लेकर लोगों और संबंधित संस्थाओं को नियम समझने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

The Rashtra Darpan
Author: The Rashtra Darpan

द राष्ट्र दर्पण

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